धात एक पुरुषों संबंधित शारीरिक बीमारी है। इस बीमारी में पुरुष का विर्ज पेशाब अथवा मल के साथ अपने आप निकल जाता है। विर्ज का निर्माण हमारे शरीर में मौजूद प्रोटीनस से होता है, इस कारण इसका अपने आप निकलना शरीर तथा हमारी सेक्स लाइफ के लिए काफी नुकसान दायिक होता है। इसके निरंतर रिसाव से कमज़ोरी, संभोग करने इच्छा शक्ति कम होना, पुरे शारीरक तन्त्र का कमज़ोर होना, लिंग में तनाव की कमी आदि जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यदि आप इस बीमारी से ग्रस्त हैं और आप इस बीमारी का समय पर आयुर्वेदिक ईलाज नहीं करवाते हैं, तो यह बीमारी आपकी सेक्स करने की इच्छा शक्ति को पूरी तरह खत्म करने के इलावा नामर्दी जैसी भयंकर नतीजे दे सकती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति लड़कियों से दूर भागने लगता है।

धात की बीमारी के मुख्य कारण

  1. पतला विर्ज:- कईं बार विर्ज काफी पतला होने के कारण पुरुष इसको सम्भाल नहीं पता है। संभोग के समय भी विर्ज लिंग में तनाव आते ही अपने आप 1 से 2 मिनट के अन्तराल में निकल जाता है और यदि मरीज़ इसका इलाज नहीं करवाता है तो यह पेशाब तथा मल के साथ भी निकलना शुरू हो जाता है।
  2. लिंग की कमज़ोर मासपेशियाँ:- बहुत अधिक हस्तमैथुन, किसी चोट या किसी अन्य बीमारी की वजह से लिंग की मासपेशियों में कमज़ोरी आने की वजह से भी पुरुष का लिंग इतना कमज़ोर हो जाता है कि यह विर्ज को सम्भाल नहीं पता है।

धात का ईलाज

आरोग्य विज्ञान में हम विश्व की सबसे बढ़िया जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करते हैं। जोकि दो प्रकार से कार्य करती हैं तथा मरीज़ को लाभ पहुंचाती हैं।

  1. विर्ज को गाढा करतीं हैं।
  2. लिंग की मासपेशियों को मजबूत बनती हैं।

हमारा आयुर्वेदिक ईलाज 100% शुद्ध तथा प्राक्रतिक होता है। हमारे द्वारा उपयोग की जाने वाली जड़ी बूटियां आपको प्राक्रतिक तत्व तथा पदार्थ प्रदान करती हैं, जोकि आपकी सेक्सुअल तन्त्र को ठीक करने के साथ-साथ आपके पुरे शरीर को तंदरुस्त और आरोग्य बनती है। हम जड़ी बूटियों का चुनाव आपकी बीमारी के हिसाब से करते हैं।